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ओडिशा DGP नियुक्ति मामले में सुप्रीम कोर्ट में विवाद, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मांगी माफी

नई दिल्ली। ओडिशा के पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में अमिकस क्यूरी वरिष्ठ अधिवक्ता राजू रामचंद्रन की भूमिका को लेकर की गई टिप्पणी पर विवाद खड़ा हो गया। ओडिशा के एडवोकेट जनरल पीतांबर आचार्य की टिप्पणी के एक दिन बाद गुरुवार को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में माफी मांगी। यह मामला सुप्रीम कोर्ट के 2006 के प्रकाश सिंह फैसले में DGP नियुक्ति को लेकर निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुपालन से जुड़ा है।
विवाद बुधवार की सुनवाई के दौरान शुरू हुआ था। एडवोकेट जनरल पीतांबर आचार्य ने अमिकस क्यूरी राजू रामचंद्रन की दलीलों को लेकर कहा था कि ऐसा लग रहा है जैसे वह याचिकाकर्ता की ओर से मामला पेश कर रहे हों। रामचंद्रन ने इस टिप्पणी पर गंभीर आपत्ति जताई और इसे वापस लेने की मांग की।
मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहन की पीठ कर रही है। अदालत के सामने ओडिशा सरकार द्वारा DGP नियुक्ति के लिए अपनाई गई प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न सवाल विचाराधीन हैं।
रामचंद्रन ने टिप्पणी पर जताई कड़ी आपत्ति
एडवोकेट जनरल की टिप्पणी के बाद राजू रामचंद्रन ने कहा कि यदि इस तरह का आरोप रिकॉर्ड पर रहने दिया जाता है तो उनके लिए इस मामले में अमिकस क्यूरी के रूप में आगे बने रहना मुश्किल होगा।
रामचंद्रन ने अदालत के सामने अपनी करीब 50 वर्षों की कानूनी प्रैक्टिस का उल्लेख करते हुए कहा कि उन पर पहले कभी सुप्रीम कोर्ट में अनुचित तरीके से व्यवहार करने जैसा आरोप नहीं लगाया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमिकस क्यूरी के रूप में उनकी जिम्मेदारी अदालत की सहायता करना है, न कि किसी एक पक्ष का प्रतिनिधित्व करना। रिपोर्ट के मुताबिक पीठ ने भी इस घटनाक्रम के दौरान हस्तक्षेप किया।
अगले दिन तुषार मेहता ने मांगी माफी
गुरुवार को मामले से जुड़े घटनाक्रम के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने रामचंद्रन से माफी मांगी। इस पर रामचंद्रन ने मेहता के कदम की सराहना करते हुए कहा कि यह उनकी उदारता है, जबकि वे स्वयं उस टिप्पणी में शामिल नहीं थे।
सुप्रीम कोर्ट के 22 सितंबर के रिकॉर्ड में इस मामले में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, ओडिशा के एडवोकेट जनरल पीतांबर आचार्य सहित संबंधित वकीलों की उपस्थिति दर्ज है।
क्या है ओडिशा DGP नियुक्ति विवाद
सुप्रीम कोर्ट में चल रहा मामला ओडिशा के अगले पुलिस महानिदेशक की चयन और नियुक्ति प्रक्रिया से संबंधित है। याचिकाओं में राज्य सरकार द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया को चुनौती दी गई है और आरोप लगाया गया है कि यह प्रकाश सिंह मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप नहीं है। राज्य सरकार ने इन मुद्दों पर अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखा है और मामले पर अभी अंतिम फैसला नहीं आया है।
विवाद में पात्र IPS अधिकारियों की सूची और पैनल तैयार करने की प्रक्रिया से जुड़े सवाल भी उठाए गए हैं। अमिकस क्यूरी राजू रामचंद्रन ने अपनी प्रस्तुतियों में वरिष्ठ IPS अधिकारी सुसांत कुमार नाथ को पात्रता सूची से बाहर किए जाने, इंटीग्रिटी सर्टिफिकेट और बाद में सूची में शामिल किए गए कुछ अधिकारियों की पदोन्नति से संबंधित मुद्दों पर सवाल उठाए थे।
अमिकस क्यूरी ने प्रक्रिया पर उठाए सवाल
राजू रामचंद्रन को इस मामले में अदालत की सहायता के लिए अमिकस क्यूरी नियुक्त किया गया है। उन्होंने अपनी रिपोर्ट और दलीलों में DGP चयन प्रक्रिया के विभिन्न पहलुओं की ओर पीठ का ध्यान आकर्षित किया है।
इससे पहले हुई सुनवाई में उन्होंने चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और स्थापित दिशा-निर्देशों के अनुपालन से संबंधित सवाल रखे थे। विशेष रूप से पात्र अधिकारियों की सूची तैयार करने और कुछ अधिकारियों को शामिल या बाहर करने के आधार पर चर्चा हुई है।
यही वह पृष्ठभूमि थी जिसमें बुधवार को एडवोकेट जनरल और अमिकस क्यूरी के बीच तीखी बहस हुई। रामचंद्रन का कहना था कि अदालत की सहायता के लिए नियुक्त अमिकस के काम को किसी पक्ष की पैरवी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
प्रकाश सिंह फैसले से जुड़ा है मामला
ओडिशा DGP नियुक्ति का विवाद सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ मामले में जारी निर्देशों के संदर्भ में सुना जा रहा है। 2006 के इस फैसले में पुलिस सुधारों के साथ राज्यों में DGP की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर भी दिशा-निर्देश दिए गए थे।
वर्तमान मामले में याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि ओडिशा में अपनाई जा रही प्रक्रिया इन निर्देशों के अनुरूप नहीं है। दूसरी ओर राज्य सरकार अदालत में अपना पक्ष रख रही है। सुप्रीम कोर्ट ने अभी इन विवादित मुद्दों पर अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है।
सुप्रीम कोर्ट में जारी है सुनवाई
ओडिशा सरकार ने इससे पहले मामले में अपना जवाब दाखिल किया था और UPSC ने भी ओडिशा के प्रस्ताव को लेकर अपना जवाब अदालत के सामने रखा है। 18 अगस्त के सुप्रीम कोर्ट आदेश में दोनों जवाब दाखिल होने का उल्लेख है।
इसके बाद अलग-अलग सुनवाइयों में पात्रता सूची, अधिकारियों के नाम, चयन प्रक्रिया और अमिकस की रिपोर्ट से जुड़े मुद्दों पर बहस जारी रही। अदालत के समक्ष दोनों पक्ष अपने-अपने तर्क रख रहे हैं और अमिकस क्यूरी प्रक्रिया से जुड़े कानूनी एवं प्रशासनिक पहलुओं पर अदालत की सहायता कर रहे हैं।
इसी सुनवाई के दौरान हुई व्यक्तिगत टिप्पणी ने एक अलग विवाद पैदा कर दिया। राजू रामचंद्रन की कड़ी आपत्ति के बाद अगले दिन सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की ओर से माफी मांगे जाने से इस घटनाक्रम ने नया मोड़ लिया। फिलहाल मुख्य मामला ओडिशा में DGP की नियुक्ति प्रक्रिया और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्देशों के अनुपालन से जुड़ा है, जिस पर शीर्ष अदालत में सुनवाई जारी है।





